शौर्य नमन – बलिदान दिवस
नायक अशोक कुमार वाल्मीकि
यूनिट – 4/3 गोरखा राइफल्स
बटालिक का संग्राम
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
नायक अशोक कुमार का जन्म उत्तरप्रदेश के बिजनौर जिले के नूरपुर ब्लॉक के फीना गांव में, श्री लक्ष्मण सिंह वाल्मीकि एवं श्रीमती ओमवती देवी के परिवार में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वह भारतीय सेना की 3 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 4 बटालियन में राइफलमैन के पद पर नियुक्त किया गया था। अपनी बटालियन में भिन्न-भिन्न परिचालन परिस्थितियों और स्थानों पर सेवाएं देते हुए वर्ष 1999 तक वह नायक के पद पर पदोन्नत हो गए थे।
“ऑपरेशन विजय” में, हजारों फीट ऊंचे, हिमाच्छादित, कठिन चढ़ाई की, लंबवत पहाड़ियों के, शत्रु के तोपखाने व स्वचालित शस्त्रों की गोलाबारी में घिरे बटालिक सेक्टर के संग्राम में, 11 जुलाई 1999 को अदम्य साहस, दृढ़ निश्चय एवं वीरता से युद्ध करते वह वीरगति को प्राप्त हुए थे।
गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का नाम उनके नाम पर किया गया है। इनकी स्मृति में गांव में बेलबाबा चौराहे पर एक पार्क का निर्माण किया गया है, जिसमें उनकी प्रतिमा स्थापित है। फीना गांव से चांदपुर को जोड़ने वाली सड़क का नाम ‘कारगिल हुतात्मा अशोक कुमार मार्ग’ किया गया है।
नायक अशोक कुमार वाल्मीकि के बलिदान को भारत में, युगों-युगों तक स्मरण किया जाएगा। 


जय हिंद!! जय जवान!!
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जय हिन्द
वंदेमातरम
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टीम शौर्य गाथा शौर्य नमन
